मजमा ऐ हुस्न कही , जब यूही जमा हो जाएगा
मेरी तो नजरे वही है , नजर जहा तू आएगा
जो देखे नजरो से मेरी , तुझसा हंसीं नही है कोई
मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...
***
उगता है सूरज तभी , जब जागे तू नीद से अपनी
मेरी तो राते होती है , बंद करे जब आंखे अपनी
रौशन होगा जहाँ मेरा , जब भी तू मुस्कुरा जाएगा
मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...
***
गम है ज़माने मे कई मगर , तू है मेरे गम की दवा
चलती है जो सांसे हमारी , तू है इनकी महकती हवा
हो जाएगा जीवन सफल , जो तू मुझमे मिल जाएगा
मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...
Friday, March 19, 2010
इस जहाँ मे हुस्न के, दीवाने है कई
इस जहाँ मे हुस्न के, दीवाने है कई
हुस्न एक तुम, परवाने है कई
मै भी हू दीवाना तेरे, हुस्न ऐ दीदार का
पर क्या करू यारा, तुझे देखने वाले है कई
जैसे जुदा सब चेहरे यहाँ, जुदा है रंग कई
चेहरा एक तुम, अफ़साने है कई
मै भी हू परवाना तेरे, चश्मे बेदार का
पर क्या करू दिलदारा, तुझे चाहने वाले है कई
खुमार ऐ जाम का, या लबों से तेरे अनजाने है कई
जाम एक तुम, महखाने है कई
मै भी एक तराना तेरे, चर्चा ऐ नामदार का
पर क्या करू यारा, तुझे गाने वाले है कई
हुस्न एक तुम, परवाने है कई
मै भी हू दीवाना तेरे, हुस्न ऐ दीदार का
पर क्या करू यारा, तुझे देखने वाले है कई
जैसे जुदा सब चेहरे यहाँ, जुदा है रंग कई
चेहरा एक तुम, अफ़साने है कई
मै भी हू परवाना तेरे, चश्मे बेदार का
पर क्या करू दिलदारा, तुझे चाहने वाले है कई
खुमार ऐ जाम का, या लबों से तेरे अनजाने है कई
जाम एक तुम, महखाने है कई
मै भी एक तराना तेरे, चर्चा ऐ नामदार का
पर क्या करू यारा, तुझे गाने वाले है कई
चाहते हर पल बदलती
चाहते हर पल बदलती, हवाओ के रुख सी यहाँ
मोहब्बते दरदर भटकती, निगाहे भी बेरुख सी यहां
दुआए मांग रही हीर, पर राँझा है किसी और के संग
हाँ, आजकल मोहब्बतों का, बस यही है एक रंग
मोहब्बते दरदर भटकती, निगाहे भी बेरुख सी यहां
दुआए मांग रही हीर, पर राँझा है किसी और के संग
हाँ, आजकल मोहब्बतों का, बस यही है एक रंग
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू ...
चारो तरफ़ अँधेरा, सब कहते अँधेरी रात है
बात है कुछ और मगर, सब कहते यही बात है
राज की एक बात तुम्हे, मै बतलाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
लिपट गई थी चांदनी मुझसे, भूल कर बात सब
इसीलिए तो छाई थी, देखो अँधेरी रात तब
नासमझ चांदनी की तुम्हे, दास्तान सुनाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
कह गई वह बात मुझसे, जिसका कोई मतलब न था
बेवफा चाँद भी है, इसका मुझे तलब न था
चाँद संग अँधेरी का रिश्ता, चांदनी को समझाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
तुम्हारा रूप संवारने खातिर, चाँद अँधेरी से मिलने जाता है
तुम्हे सबसे बेहतर बनाने मे, वह पन्द्रह दिवस लगाता है
अँधेरी बस जरिया, तुम, चाँद की पूरी मोहब्बत, समझाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
मेरी बातो का मतलब शायद, चांदनी को समझ आया था
इसीलिए तो देखो तुम, आज, चाँद पूरा नजर आया था
भूल गम अपने सारे, मै, चांदनी मे रंगजाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
बात है कुछ और मगर, सब कहते यही बात है
राज की एक बात तुम्हे, मै बतलाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
लिपट गई थी चांदनी मुझसे, भूल कर बात सब
इसीलिए तो छाई थी, देखो अँधेरी रात तब
नासमझ चांदनी की तुम्हे, दास्तान सुनाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
कह गई वह बात मुझसे, जिसका कोई मतलब न था
बेवफा चाँद भी है, इसका मुझे तलब न था
चाँद संग अँधेरी का रिश्ता, चांदनी को समझाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
तुम्हारा रूप संवारने खातिर, चाँद अँधेरी से मिलने जाता है
तुम्हे सबसे बेहतर बनाने मे, वह पन्द्रह दिवस लगाता है
अँधेरी बस जरिया, तुम, चाँद की पूरी मोहब्बत, समझाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
मेरी बातो का मतलब शायद, चांदनी को समझ आया था
इसीलिए तो देखो तुम, आज, चाँद पूरा नजर आया था
भूल गम अपने सारे, मै, चांदनी मे रंगजाने आया हू
चाँद से ख़फा उसकी, चांदनी को मिलाने आया हू
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
कह जाऊं वों बातें तुझसे, जो न कह पाऊं
मोहब्बते गुलिस्ताँ से एक फूल मैंने चुना
फूल से कांटो का चुभना, देख अब घबराऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
रहमते खुदा सा, तेरी हंसी पर गुमाँ था कभी
अब उसी हंसी का ढंग देख, क्यू न मर जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
खुश्बुए मीठी थी कुछ पल, फिर जो बदली फिजां है
आज तलक बैठा हू काश, पल वही पा जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
सोचता हू अब कही न हो कोई शिकवा गिला
या हर गिला को याद कर, तुझे भूल जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
कह जाऊं वों बातें तुझसे, जो न कह पाऊं
मोहब्बते गुलिस्ताँ से एक फूल मैंने चुना
फूल से कांटो का चुभना, देख अब घबराऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
रहमते खुदा सा, तेरी हंसी पर गुमाँ था कभी
अब उसी हंसी का ढंग देख, क्यू न मर जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
खुश्बुए मीठी थी कुछ पल, फिर जो बदली फिजां है
आज तलक बैठा हू काश, पल वही पा जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
सोचता हू अब कही न हो कोई शिकवा गिला
या हर गिला को याद कर, तुझे भूल जाऊं मै
आज पास आऊँ तेरे, या दूर चला जाऊं मै
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