Friday, March 19, 2010

मजमा ऐ हुस्न कही

मजमा ऐ हुस्न कही , जब यूही जमा हो जाएगा

मेरी तो नजरे वही है , नजर जहा तू आएगा

जो देखे नजरो से मेरी , तुझसा हंसीं नही है कोई

मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...

***
उगता है सूरज तभी , जब जागे तू नीद से अपनी

मेरी तो राते होती है , बंद करे जब आंखे अपनी

रौशन होगा जहाँ मेरा , जब भी तू मुस्कुरा जाएगा

मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...

***
गम है ज़माने मे कई मगर , तू है मेरे गम की दवा

चलती है जो सांसे हमारी , तू है इनकी महकती हवा

हो जाएगा जीवन सफल , जो तू मुझमे मिल जाएगा

मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...

7 comments:

Anonymous said...

हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है

अच्छा लिखें, अच्छा पढ़ें

बी एस पाबला

kshama said...

गम है ज़माने मे कई मगर , तू है मेरे गम की दवा

चलती है जो सांसे हमारी , तू है इनकी महकती हवा
kya khoob likha hai!

shama said...

जो देखे नजरो से मेरी , तुझसा हंसीं नही है कोई

मुझे पता है सदियों से यह , तुझे पता चल जाएगा ...
Harek rachana sundar hai..

Anonymous said...

Bahut Khub. Shubhkamnaye.

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

Chandan Kumar Jha said...

स्वागत है आपका

गुलमोहर का फूल

Anonymous said...

रौशन होगा जहाँ मेरा , जब भी तू मुस्कुरा जाएगा
this is the spirit